दिग्गज विज्ञापन निर्माता पियुष पांडे का निधन, भारतीय विज्ञापन जगत में शोक की लहर

Piyush Pandey Death : भारतीय विज्ञापन जगत के सबसे बड़े नामों में शुमार पियुष पांडे का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे मीडिया और मार्केटिंग जगत में शोक की लहर फैल गई है। उन्हें भारतीय विज्ञापन की आत्मा कहा जाता था, जिन्होंने ब्रांड्स को आम जनता की भावनाओं से जोड़ने की कला विकसित की थी।
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जीवन और करियर
पियुष पांडे का जन्म 5 सितंबर 1955 को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत क्रिकेट और चाय-टेस्टिंग के क्षेत्र से की थी। वे राजस्थान की रणजी टीम के लिए भी खेल चुके थे। इसके बाद उन्होंने 1982 में Ogilvy & Mather (Ogilvy India) में क्लाइंट सर्विसिंग विभाग से अपनी विज्ञापन यात्रा की शुरुआत की।
धीरे-धीरे अपनी रचनात्मक सोच और भारतीय समाज की गहरी समझ के चलते वे कंपनी के क्रिएटिव डायरेक्टर, नेशनल क्रिएटिव डायरेक्टर और अंततः एक्सीक्यूटिव चेयरमैन के पद तक पहुंचे। उन्होंने चार दशकों तक भारतीय विज्ञापन को नई दिशा दी।
रचनात्मक योगदान और विरासत
पियुष पांडे ने कई ऐसे यादगार विज्ञापन अभियान बनाए जो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। इनमें शामिल हैं —
Fevicol का ‘झटपट जॉड़’, Cadbury Dairy Milk का ‘कुछ खास है’, और Asian Paints का ‘हर खुशी में रंग लाए’।
उन्होंने विज्ञापन में भारतीयता और स्थानीय संवेदनशीलता का समावेश किया। पियुष पांडे के विज्ञापन केवल उत्पाद बेचने के लिए नहीं, बल्कि भावनाएं जगाने के लिए बनाए जाते थे। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और जनता से जुड़ी होती थी।
विज्ञापन क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। वे कई बार कैनस लायंस अवॉर्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का नाम रोशन कर चुके थे।
निधन और प्रतिक्रिया
खबरों के मुताबिक, पियुष पांडे का निधन 23-24 अक्टूबर 2025 की रात को हुआ। बताया जा रहा है कि वे निमोनिया और संक्रमण से जुड़ी जटिलताओं से जूझ रहे थे। उनके परिवार में उनकी बहन, मशहूर गायिका और अभिनेत्री इला अरुण, सहित कई परिजन हैं।
उनके निधन की खबर फैलते ही देशभर से शोक संदेश आने लगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा —
“श्री पियुष पांडे जी को उनकी रचनात्मकता और भारतीय विज्ञापन को नई पहचान देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा।”
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उन्हें याद करते हुए लिखा —
“अलविदा मेरे दोस्त… तुम्हारी रचनात्मकता और सादगी कभी भुलाई नहीं जा सकेगी।”
उनका प्रभाव और विरासत
पियुष पांडे ने भारतीय विज्ञापन को सिर्फ एक मार्केटिंग टूल से उठाकर कला का रूप दिया। उन्होंने यह साबित किया कि विज्ञापन तभी असरदार होता है जब वह दिल से जुड़ा हो।
उनकी सोच ने भारतीय ब्रांड्स को यह आत्मविश्वास दिया कि वे अंग्रेज़ी या पश्चिमी प्रभाव के बिना भी विश्वस्तरीय पहचान बना सकते हैं।
आज भी कई युवा विज्ञापन पेशेवर उन्हें “मेंटॉर” और “प्रेरणा स्रोत” मानते हैं। उनके बनाए ब्रांड स्लोगन, संवाद और विज़ुअल्स आने वाले वर्षों तक याद किए जाएंगे।
निष्कर्ष
पियुष पांडे का जाना भारतीय विज्ञापन जगत के लिए एक युग का अंत है। उन्होंने अपनी सोच, शब्दों और भावनाओं से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई।
उनकी रचनात्मकता ने यह साबित किया कि एक अच्छा विज्ञापन केवल बेचता नहीं — बल्कि जोड़ता है, महसूस कराता है, और याद रह जाता है। भारतीय विज्ञापन की दुनिया में उनका नाम हमेशा प्रेरणा और उत्कृष्टता का प्रतीक रहेगा।
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